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किसी को दूसरे प्रदेश की ट्रैवल हिस्ट्री पर भी बिना सैंपल लिए लौटाया, किसी की दो महीने में तीन बार कर दी जांच

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स्वास्थ्य विभाग का कोरोना काल में नियमों के साथ खेल चल रहा है। स्वास्थ्य मुख्यालय से हर किसी के लिए एक नियम निर्धारित होकर लागू करवाए जाते हैं लेकिन जिला स्तर पर नियम सामने वाले का रसूख देखकर लागू होता है। कोरोना के किसी में लक्षण दिख सकते हैं तो कोई बिना लक्षणों के संक्रमित मिल सकता है। ऐसे केसों के प्रमाण किसी से छुपे नहीं है।

कहीं गुरुग्राम-दिल्ली से आवागमन करने वाला व्यक्ति तीन बार सैंपलिंग करवा चुका है तो कहीं पुणे-यूपी या फिर अन्य हॉट जिलों-राज्यों से लौटने वाले लोगों की सैंपलिंग की बजाय क्वारेंटाइन की मुहर लगाकर घर लौटा दिया जाता है। न सिर्फ ये बल्कि इनके परिजन भी क्वारेंटाइन पीरियड पूरा होने तक दहशत में रहते हैं।

इतना ही नहीं बिना सैंपलिंग क्वारेंटाइन लोगों के घर हेल्थ टीम पोस्टर चस्पाने पहुंच जाती है तो यह नियम वीआईपी के समय लागू करते हुए अफसरों के हाथ-पांव फूल जाते हैं। मेयर की रिपोर्ट्स के खेल को देखते हुए आमजन भी स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगे हैं।

इन किस्सों से जानिए.... नियमों में भेदभाव
1. शहर के पॉश इलाके में रहने वाला एक शख्स मई व जून माह में तीन बार ओपीडी बेस पर कोविड टेस्ट करवा चुका है। 29 मई को दिल्ली, 12 जून को गुरुग्राम और 28 जून को दिल्ली से लौटने पर सैंपल करवाया। हालांकि रिपोर्ट निगेटिव आई मगर लगातार सैंपलिंग स्वास्थ्य विभाग की कार्य प्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। किसकी शह पर यह सैंपलिंग होती रही, इसका विभाग के अफसरों ने पता लगाना मुनासिब नहीं समझा है।
2. अर्बन एस्टेट एरिया में रहने वाला एक युवक उत्तर प्रदेश गया था। लॉकडाउन के कारण वहां से लौट नहीं सका। इस दौरान उत्तर प्रदेश में कोरोना काफी फैल चुका था। अनलॉक में वह जैसे-तैसे हिसार स्थित घर लौटा। जागरूक नागरिक है इसलिए कोविड जांच के लिए फ्लू क्लीनिक पहुंच गया। डॉक्टर्स ने सैंपलिंग से मना करते हुए होम क्वारेंटाइन कर दिया। 14 दिन तक खुद को अलग कमरे में रखा लेकिन परिवार काफी दहशत में रहा।
3. पुणे से सेक्टर 9-11 में एक युवक हिसार लौटा था। वह फ्लू क्लीनिक में सैंपल देने गया था। डॉक्टर ने कहा कि आपके लक्षण नहीं दिख रहे हैं। इसलिए सैंपलिंग की जरूरत नहीं है। यह सलाह दी कि जब लक्षण लगे तो आकर सैंपल करवा लेना। युवक ने भी 14 दिन का क्वारेंटाइन घर में गुजारा।
4. फ्लू क्लीनिक पर हेल्थ व कोविड जांच करवाने आने वालों की सटीक व सम्पूर्ण जानकारी दर्ज नहीं हो रही है। किसी का फोन नंबर गलत लिखा जाता है तो किसी का पता। इनके कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद तलाश करके आइसोलेट करना विभाग के लिए सिरदर्द बन रहा है।



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