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बेटी की शादी के लिए मां बेच रही थी मकान, लॉकडाउन में आठ हजार रुपए ही आया खर्च

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(अजय भाटिया)कोरोना की वजह लॉकडाउन में हुईं शादियों में दिखावे पर रोक लगने से कम आदमी बुलाने से खर्च कम हो गया है। जिनको बेटियों की शादी में लाखों खर्च करने थे, अब उनका काम नाममात्र के खर्च में ही चल गया। ऐसा ही उदाहरण सामने आए हैं रेवाड़ी में। यहां के मोहल्ला गुलाबी बाग की रहने वाली पुष्पा को फार्मेसी द्वितीय वर्ष में पढ़ रही छोटी बेटी नीरू की शादी में खर्च के लिए 5 लाख रुपए जुटाने थे। इसलिए उन्होंने 50 गज का मकान बेचने का मन बना लिया, लेकिन बेटी का रिश्ता हुआ तो कुछ दिन बाद लॉकडाउन हो गया।

शादियों में बैंड-बाजा और 50 से अधिक लोगों के आयोजन पर बैन हो गए। ऐसे में शादी हुई तो वर पक्ष से सिर्फ 4 ही लोग शामिल हुए। सादे तरीके से झज्जर के दीपक कौशिक से नीरू के विवाह की रस्में संपन्न हो गईं। पूरे आयोजन में खर्च महज 8 हजार रुपए। इतने कम खर्च पर आंखों में आंसू लिए पुष्पा कहती हैं कि गरीब की बेटियों की शादी के लिए तो लॉकडाउन ही सतयुग है। सरकार को शादी के मानकों का यही कानून बना देना चाहिए।

7 लोग ही बाराती : गुड़गांव में निजी कंपनी में बतौर असिस्टेंट मैनेजर कार्यरत सेक्टर-4 निवासी विनीत यादव 11 जून को वहां के मोकलवास निवासी ज्योति के साथ विवाह बंधन में बंधे। विनीत के पिता पूर्व कार्यकारी बीईओ ओपेंद्र यादव बताते हैं कि बारात में फोटोग्राफर सहित 7 ही लोग शामिल हुए थे। दहेज में सिर्फ एक रुपया लिया। कुछ रिश्तेदारों को फोन करके समझाना पड़ा।



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झज्जर के नीरू और दीपक मंडप में।


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