Header Ads

Breaking News

एप से खेतों की मॉनिटरिंग करेंगे, केमिकल का असर खत्म कर सुधारेंगे चावल की क्वालिटी

https://ift.tt/2BX92um

किसानों की ओर से अच्छे किस्म का बासमती धान उगाने के बाद भी उनका चावल एक्सपोर्ट नहीं हो पाता। वजह सैंपल फेल हाेना रहता है। कैमिकल प्रयोग के बाद समय पर फसल में अवशोषित नहीं हाेता, जिससे धान कैमिकल युक्त होने पर सैंपल फेल हो जाता है। मजबूरी में किसानाें काे करनाल जैसी चावल एक्पाेर्ट मंडी में अपनी फसल को कम दाम पर बेचना पड़ता है। इस समस्या का हल निकालने के लिए आईआईटीयन और पूर्व पायलट ने एकसाथ मिलकर स्टार्टअप शुरु किया है।

टीम में कई राज्यों व विदेश के युवाओं भी जुड़े हैं। इस टीम ने पिंड दी नाम से एक ऐप तैयार की है। ऐप के जरिए किसानों के खेतों की जिओ टैगिंग करने से लेकर उनकी जमीन का पूरा डेटा ऑनलाइन किया जा रहा है। फसल में डाले जाने वाले हर कैमिकल व खाद-पानी व उसकी सैंपलिंग तक की हर रिपोर्ट को ऐप के जरिए मॉनिटर किया जाता है। मकसद फसल में ऐसे कैमिकल का प्रयोग हो जो सैंपलिंग तक के प्रोसेस में अपना असर खत्म कर चुका हो। इससे किसान के धान को चावल मंडी में बेहतर दाम मिलेंगे व देश की चावल एक्सपोर्ट क्वालिटी भी लाजवाब होगी।

टीम ने पहले चरण में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर महम ब्लाक के गांव निड़ाना को चुना है। कृषि विशेषज्ञों की राय के लिए नई दिल्ली के नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (पूसा) के मुख्य अधिकारी सहयोग कर रहे हैं, ताकि किसानों की फसल को बेहतर बनाने में जुटी युवा टीम को आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिल सके।

कनाडा के डिजाइनर से जुड़ने के लिए करते हैं रात का इंतजार : खास बात यह है कि ये युवा काम तो दिन में नौकरी करते हैं, लेकिन सबसे बड़ी समस्या इन्हें तब आती है जब ऐप डेवलप करने के लिए डिजाइनर सिमरनजीत सिंह की जरूरत होती है। कनाडा में रहने वाले सिमरनजीत सिंह की जब कनाडा में सुबह हाेती है तब भारत में रात हो चुकी होती है। ऐसे में रात दस बजे के बाद सभी मिलकर एक-दूसरे से ऑनलाइन वीडियो कांफ्रेंस के जरिए जुड़ते हैं।

रायशुमारी कर दिनभर के काम की रिपोर्ट आपस में शेयर करते हैं, ताकि किसानों की मौलिक जरुरतों के अनुसार ऐप में बदलाव किया जा सके। नौकरी खत्म करने के बाद युवा कभी रात में तो कभी छुट्टी वाले इस प्रोजेक्ट को लेकर काम करते हैं। आने वाले समय में इसमें मौसम का डेटा से लेकर अन्य सुविधा भी ऐप के जरिए दी जा सकेंगी।

यूं काम करेगा प्राेजेक्ट : पूर्व पायलट गौरव कुमार कहते हैं कि इस प्रोजेक्ट के तहत महम के निड़ाना गांव में किसानों व उनके खेतों का डेटा अपलोड किया जा चुका है। सभी का डेटा आने के बाद नई दिल्ली के नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट के प्रिंसीपल साइंटिस्ट डाॅ. एचआर सरदाना और कटेट के हेड डाॅ. जेपी डबास की ओर से एक्सपर्ट राय लेकर साझा किया जाता है कि फसल में अब किस तरह से बदलाव करवाए जाएं और किस कैमिकल का उचित प्रयोग किया जाए।

विशेषज्ञों के मुताबिक एक्सपोर्ट में सबसे बड़ी समस्या सैंपल फेल होने की बताई गई। चूंकि कैमिकल प्रयोग के बाद समय पर वह फसल में अवशोषित नहीं हाेता, जिससे धान कैमिकल युक्त होने पर सैंपल फेल हो जाता है। ऐसे में कैमिकल का भी बदलाव कर रहे हैं, जोकि कैमिकल सैंपलिंग के समय तक फसल में अपना असर खत्म कर चुका हो। वैज्ञानिकाें की टीम भी पायलट प्राेजेक्ट काे सफल बनाने के लिए अब गांव के दौरे कर रही है।

यूं आया आइडिया, नौकरी छोड़ जोड़ी टीम : इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी में पूर्व पायलट रह चुके गौरव कुमार मूल रूप से महम के निड़ाना गांव के हैं। नौकरी छोड़ने के बाद किसानों की फसल को एक्सपाेर्ट करने और उनके सही दाम दिलवाने के आइडिया पर काम करने की सोची। इसके लिए वेबसाइट डेवलपिंग का कोर्स किया। बाद में वेबसाइट डेवलपिंग की कंपनी गुड़गांव में जॉब करने लगे। वर्ष 2019 में कंपनी में ही टेक्नोलॉजी के एक्सपर्ट युवाओं की आपस में मुलाकात हुई और एक टीम बनाई, जिसके जरिए ऐप डेवलप कर इस प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने के लिए काम शुरु किया।

इस स्टार्टअप में फाउंडर पूर्व पायलट गौरव कुमार, को-फाउंडर आईआईटी बीएचयू से पासआउट श्रीकांत रेड्‌डी जोकि हैदराबाद से, ऐप डेवलपर कुनाल चुघ नोएडा से, कनाडा से सिमरनजीत सिंह डिजाइनर, क्षितिज यादव साफ्टवेयर डेवलपर इलाहाबाद से, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग पर काम करने के लिए ऐश्वर्या बनारस से और अतुल जयपुर के रहने वाले हैं। सभी मिलकर इस काम को सिरे चढ़ाने में दिन-रात जुटे हैं।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
पिंड दी स्टार्टअप शुरू करने वाली आईटी एक्सपर्ट पूर्व पायलट व आईआईटीएन युवाओं की टीम।


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3grOyZP

कोई टिप्पणी नहीं