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मानसून के साथ ही राजस्थानी चरवाहों के आने का सिलसिला भी शुरू

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मानसून के साथ ही राजस्थानी चरवाहों का हरियाणा आने का सिलसिला शुरू हो गया है। अपने मवेशियों के साथ चारा व पानी की तलाश में हर वर्ष सैकड़ों राजस्थानी परिवार दक्षिणी हरियाणा के विभिन्न क्षेत्रों में आते हैं। ये चरवाहे किसी एक स्थान पर नहीं रहते, बल्कि चारे व पानी की जरुरत के अनुसार घूमते रहते हैं। राजस्थान के नागौर, जालौर, जैसलमेर, बाडमेर आदि जिलों में चारे व पानी की समस्या पैदा हो जाती है।

इसलिए ये पानी व चारे की तलाश करने के लिए पशुओं के समूह के साथ हरियाणा का रुख कर लेते हैं। अपने साथ सैकड़ों की तादाद में पशुओं को लिए ये घुमक्कड़ चरवाहे एक प्रकार से भूमि प्रबंधन और पारिस्थितिकीय संतुलन में अपनी जरूरी भूमिका निभाते हैं। जिस इलाके से ये गुजरते हैं, वहां पशुओं के मल से भूमि की उर्वरता बढ़ती है। जैव विविधता के लिए भी पशुओं का होना जरूरी है। हालांकि इस साल कोरोना महामारी के चलते यह समुदाय गहरी पीड़ा में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है।



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With the monsoon, the process of the arrival of Rajasthani shepherds also started


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