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तीन माह बाद ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से लौटे एचएयू के छात्रों के दल ने पूरा किया क्वारेंटाइन पीरियड, वीसी ने की मुलकात

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चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के विद्यार्थियों का 12 सदस्यीय दल तीन महीने के विशेष प्रशिक्षण के बाद हिसार लौट आया है। यह दल 17 जून को हिसार लौटा और तब से ही एचएयू के फैकल्टी हाउस में बने कोविड-19 सेंटर में क्वारेंटाइन किया हुआ था। 3 जुलाई को क्वारेंटाइन का समय समाप्त होने पर यह दल एचएयू के कुलपति प्रोफेसर के.पी. सिंह से मिला और अपने प्रशिक्षण तथा कोविड-19 के चलते आई परेशानियों आदि के बारे में चर्चा की।

एचएयू के कुलपति प्रोफेसर केपी सिंह ने दल के सभी विद्यार्थियों के सकुशल देश लौटने पर बधाई दी। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि अपने इस तीन महीने के प्रशिक्षण के दौरान जो भी तकनीकें उन्होंने आस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड में सीखी हैं, उनको यहां लागू करने की कोशिश करें ताकि यहां के अन्य विद्यार्थियों को भी उनसे प्रेरणा मिल सके। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे उत्तम गुणवत्ता वाले प्रकाशनों को बढ़ावा दें, इससे बेहतर अनुसंधानिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और गुणवत्ता में वृद्धि होगी।

अपने क्षेत्र में महारत हासिल करने के लिए प्रतिवर्ष जाता है छात्रों का दल
प्रो. के.पी. सिंह ने बताया कि एचएयू के विद्यार्थी प्रतिवर्ष राष्ट्रीय कृषि उच्च शैक्षणिक परियोजना- संस्थागत विकास योजना के तहत विश्व के विभिन्न देशों के विश्वविद्यालयों में प्रशिक्षण के लिए जाते हैं ताकि उन्हें अपने क्षेत्र में ओर अधिक महारत हासिल हो सके। एक दल 10 मार्च को आस्ट्रेलिया की सिडनी यूनिवर्सिटी व दूसरा दल 13 मार्च को न्यूजीलैंड की मैसी यूनिवर्सिटी में गया था।

छात्रों ने कुलपति व विश्वविद्यालय प्रशासन का जताया आभार
दल में शामिल बीएससी अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों आरजू, संध्या, अंजली, हेमंत, भूषण, सुमय मलिक, प्रतीक, अमन मदान, विनीत कुमार, साहिल व कन्नौज ने बताया कि कोविड-19 के चलते उन्हें कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ा लेकिन एचएयू के कुलपति प्रो. के.पी.सिंह व अनुसंधान निदेशक डॉ. एसके सहरावत उनसे लगातार संपर्क में रहे और उनकी हौसला अफजाई करते रहे।

गेहूं की रतवा बीमारी संबंधी हासिल की कई जानकारियां
विद्यार्थियों के दल ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया की सिडनी यूनिवर्सिटी में जाकर उन्होंने गेहूं में आने वाली रतुआ बीमारी को लेकर अनेक जानकारियां हासिल कीं। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया मेें गेहूं की रतुवा बीमारी संबंधी शोध के लिए विश्व के बड़ेे केंद्रों में से एक है। उन्होंने बताया कि आस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड जैसे विकसित देश आधुनिक तकनीकों, साॅफ्टवेयर व मशीनरियों का प्रयोग करके ग्रीन हाउस में सारा साल रिसर्च करते रहते हैं, जबकि अपने यहां मौसम अनुसार ही रिसर्च की जाती है।



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