इंटरनेट मिशन को अधर में छोड़कर हाईटेक ‘ग्राम स्वराज’ योजना के विस्तार में जुटी कंपनी
सरकार के निर्देशानुसार एक साल पहले गांवों में इंटरनेट पहुंचाने की मुहिम आरंभ हुई थी, लेकिन अभी तक करीब 50 फीसदी गांवों को सुविधा नहीं मिल पाई। इससे पहले ही कंपनी ने ग्राम स्वराज योजना क्रियान्वित कर दी, जिसका विस्तार प्रत्येक गांव तक करने का निर्णय लिया है, परंतु इस हाईटेक योजना को बिना इंटरनेट कैसे संचालित किया जाएगा, यह मुद्दा गांवों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
बता दें कि सरकार ने विकास कार्यों में पारदर्शिता तथा तत्परता लाने के लिए हाईटेक योजनाएं क्रियान्वित कर दी। विभिन्न पोर्टल लाॅन्च करके लोगों से सीधा संपर्क बनाने के प्रयास हो रहे हैं। इसके लिए गांवों में इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया था। बजट स्वीकृत होने के बाद जिले की सभी 346 पंचायतों में फाइबर केबल बिछा दी गई। ग्रामीणों को कनेक्सन देने तथा केबल की देखरेख करने की जिम्मेदारी सीएससी कंपनी को सौंपी गई है। इसकी एवज में कंपनी को निर्धारित सर्विस चार्ज मिलता है। शर्तानुसार कंपनी ने ब्लॉक लेवल पर चैंपियन वीएलई नियुक्त कर दिए हैं। वीएलई को एक पंचायत में इंटरनेट पहुंचाने तथा सुचारू रखने पर 1500 रुपए मासिक सर्विस चार्ज मिलता है।
सूत्रों की मानें तो नांगल चौधरी ब्लॉक में एक साल पहले लगभग 25 पंचायतों में इंटरनेट सेवाएं सुचारू थी। शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने की जिम्मेदारी सीएससी को दी गई थी, लेकिन बीते एक साल में ब्लॉक में इंटरनेट का विस्तार नहीं हुआ, बल्कि 8-8 गांवों की कनेक्टिविटी टूट गई है। इतना ही नहीं जिले के दूसरे ब्लॉकों में भी टारगेट पूरा नहीं हुआ। महेंद्रगढ़, नारनौल, कनीना, अटेली, सीहमा के करीब 96 गांव इंटरनेट से वंचित हैं। ऐसे में सरकार की ग्राम स्वराज योजना का लाभ ग्रामीणों को कैसे मिल पाएगा। इसको लेकर लोग असमंजस में दिखाई दे रहे हैं। स्थिति से प्रशासन, संबंधित विभाग तथा कंपनी के अधिकारी अवगत हैं। बावजूद लापरवाही सिस्टम दुरुस्त नहीं होने पर लोग भ्रष्टाचार के कयास लगाने लगे हैं।
डिजिटल गांव का दर्जा तो दिया मगर 80 फीसदी ग्रामीणों को इंटरनेट सेवाओं की जानकारी तक नहीं
जानकारी के मुताबिक नांगल चौधरी ब्लॉक के गोलवा, मेघोत हाला, मेघोत बींजा, लूजोता, मूसनोता, दौंखेरा समेत आठ गांवों को डिजिटल का दर्जा मिल चुका है, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार कई गांवों में सीएससी तक नहीं है। वाई-फाई चौपाल की सुविधा आज तक नहीं मिली। 80 फीसदी ग्रामीणों को डिजिटल सेवाओं की जानकारी नहीं होने के बावजूद रिकार्ड में इन्हें हाईटेक गांव बना दिया। ग्रामीणों का कहना है कि खर्चा और सुविधाएं सिर्फ कागजों में उपलब्ध हुई हैं।
फसल पंजीकरण और ऑनलाइन आवेदनों की अटकी सुविधा
लूजोता, मेघोत हाला, दौंखेरा, गोलवा के ग्रामीणों ने बताया कि पोर्टल पर फसलों का ब्याेरा देना पड़ेगा, क्योंकि पंजीकृत किसानों की फसल खरीदने का प्रावधान है। लेकिन गांव में कंप्यूटर सेंटर, सीएससी व अन्य संसाधन उपलब्ध नहीं। गोलवा गांव में तो मोबाइल का नेटवर्क तक उपलब्ध नहीं होता। किसानों को नांगल चौधरी या नारनौल जाना पड़ता है। समय के साथ पैसों की बर्बादी होती है।
वीएलई की नियुक्ति में जान-पहचान वालों को मिली प्राथमिकता
कंपनी के अनुसार चैंपियन वीएलई के लिए सीएससी की ट्रांजेक्शन, वर्क क्षमता, सेमीनार लगाने की कुशलता, आर्थिक स्थिति मजबूत तथा चैपिंयन वीएलई वाले गांव के लोग डिजिटल प्रशिक्षित होने चाहिए, लेकिन जिले में चैंपियन वीएलई की नियुक्ति में जान-पहचान वालों को प्राथमिकता मिली है। सुत्रों की मानें तो चैंपियन वीएलई को मिलने वाले सर्विस चार्ज में बंटवारा होता है। जिस कारण हाईटेक सुविधाएं कागजों में सिमटकर रह गई।
हाईवे का निर्माण और संसाधनों का अभाव
कंपनी के जिला प्रबंधक सुदर्शन शर्मा ने बताया कि नांगल चौधरी में हाईवे का निर्माण होने से केबल कटी हुई हैं। दूसरी ओर आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध नहीं हो रहे। जिस कारण पंचायतों में इंटरनेट पहुंचाना संभव नहीं हो रहा। फिर भी जीपी अप करने में जुटे हुए हैं। उन्होंने बताया कि डिजिटल गांव बनाए थे, लेकिन बजट नहीं मिला। जिस कारण वहां सुविधाएं उपलब्ध कराना संभव नहीं हो रहा।
4-5 घंटे से अधिक बाधित नहीं होती सेवाएं-
दूसरी ओर बीएसएनएल के एसडीओ संजीत सैनी ने बताया कि हाईवे के निर्माण से इंटरनेट की सेवाएं प्रभावित नहीं हुई। कभी केबल कट भी गई तो 4-5 घंटे में रिपेयर करवा दी। थनवास के पास केबल कटने से केवल रायमलिकपुर और बूढ़वाल की जीपी डाउन है। उस केबल की रिपेयर भी जल्द ही करवा दी जाएगी। उन्होंने बताया कि बीबीएनएल वाली केबलों की रिपेयर सीएससी कंपनी को करानी हैं।
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