दादरी डिपो को 3 महीने में साढ़े 7 करोड़ का नुकसान, किराए से निकल रहा सिर्फ डीजल का खर्च
दादरी रोडवेज बसों को सवारी नहीं मिलने के कारण लगातार डिपो घाटे में जाता जा रहा है। पिछले तीन महीने की बात की जाए तो डिपो को करीब साढ़े 7 करोड़ रुपये घाटा हो चुका है। अब अनलॉक वन के बाद से कुछ सवारियां मिलने लगी हैं जिनसे भी सिर्फ बसों के डीजल का खर्चा चल रहा है। बाकि दादरी डिपो के 600 कर्मचारियों की पगार परिवहन विभाग को अपने खाते से देने पड़ रहे हैं। वहीं अब इंटर स्टेट सिर्फ राजस्थान को छोड़कर कहीं पर भी बसें नहीं जा रही हैं।
हर महीने कर्मचारियों को देने पड़ रहे ढाई करोड़ रुपये
दादरी डिपो में चालक, परिचालक व अन्य स्टॉफ की कुल संख्या करीब 600 है। इन सभी कर्मचारियों की सैलरी करीब 40 हजार रुपये से एक भी कर्मचारी की कम नहीं है। ऐसे में डिपो से इन 600 रोडवेज कर्मचारियों को प्रति माह ढाई करोड़ रुपये सैलरी दी जा रही है। अप्रैल, मई और जून महीने में करीब साढ़े 7 करोड़ रुपये हरियाणा परिवहन निगम अपने 600 कर्मचारियों को सैलरी के रूप में दे चुका है। अगर जल्द ही हालात सामान्य नहीं हुए तो रोडवेज सिर्फ घाटे का सौदा हो जाएगा और कर्मचारियों का भविष्य अंधकार की तरफ जा सकता है।
पहले प्रतिदिन 12 लाख की होती थी इनकम
चरखी दादरी डिपो के पास करीब 150 बसें हैं। यह सभी बसे सामान्य दिनों में हररोज करीब 48 हजार किलो मीटर चलती थी। जिनमें प्रतिदिन करीब 52 हजार लोग यात्रा करते थे। ऐसे में डिपो में प्रतिदिन यात्रियों से 12 लाख रुपये इनकम होती थी। वहीं इस इनकम में 3 लाख रुपये की डीजल खपत भी हो जाती थी। इसके बाद डिपो को हररोज करीब 9 लाख रुपयों का लाभ होता था। मगर अब एक बस में 20 से 25 लोग की यात्रा कर रहे हैं। जिनसे रोडवेज का सिर्फ डीजल का खर्चा ही निकल रहा है।
सीमा सील होने के कारण दिल्ली में भी आवागमन बंद
अनलॉक के दौरान परिवहन निगम ने सभी जिलों के लिए रोडवेज बसे चलानी शुरू कर दी थी। इसके साथ ही दिल्ली व राजस्थान के लिए भी बसे चलानी शुरू कर दी थी। लेकिन दिल्ली कोरोना महामारी की हब बनती जा रही है। ऐसे में राज्य सरकार ने दिल्ली सीमा बंद करवा दी और वहां रोडवेज बसों की सर्विस को भी बंद कर दिया। ऐसे में अब दादरी से राज्यों के सभी जिलों में बसे चल रही हैं जिनमें मुख्यत पंचकूला और गुरुग्राम भी हैं। वहीं इंटर स्टेट सिर्फ राजस्थान के जयपुर में ही बसे जा रही हैं।
20-25 सवारी होते ही बस चला दी जाती है
^फिलहाल सवारियां कम ही आ रही हैं। ऐसे में रोडवेज बसों के डीजल का खर्चा ही किराये से चल रहा है। वहीं डिपो कर्मचारियों की सैलरी विभाग को अपने खाते से ही देनी पड़ी रही है। डिपो में जिस भी रूट की 20 या 25 सवारी हो जाती हैं बस उसी समय चला दी जाती हैं।'' -धनराज कुंडू, डिपो जीएम।
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