वेटिंग लिस्ट में थे 2 डॉक्टर्स, नहीं था लेटर बिना दस्तावेज जांचे ड्यूटी पर किया नियुक्त
सिविल अस्पताल में विभागीय लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। इतना ही नहीं एमबीबीएस कर चुके 2 डॉक्टर्स के स्तर पर नियमों को ताक पर रखा गया है। जब फर्जीवाड़ा पकड़ा गया तो विभाग ने जांच के दिशा-निर्देश जारी कर दिए। हुआ यह कि स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश में करीब 642 डॉक्टर्स की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की थी। हिसार को 31 डॉक्टर्स मिले थे, जिनकी नियुक्ति प्रक्रिया को शुरू किया था। सिविल सर्जन कार्यालय में डीलिंग हेड द्वारा डॉक्टर्स के दस्तावेज जांचे थे।
उनका नाम सिलेक्शन लिस्ट में है या नहीं इत्यादि की संपूर्ण जांच करके ज्वाइनिंग लैटर जारी करने शुरू कर दिए। इसी बीच एक पैथोलॉजिस्ट और एक आर्थो का डॉक्टर बिना सिलेक्शन लिस्ट में नाम अपनी ज्वाइनिंग करवा गया। डीलिंग हेड स्तर पर लापरवाही बरती गई। सिविल सर्जन और पीएमओ विभाग के स्तर पर दस्तावेजों की जांच नहीं हुई। करीब 2 दिन दोनों डॉक्टर्स ने अपनी सेवाएं दीं। जब अस्पताल के कुछ डॉक्टर्स को पता चला कि दोनों डॉक्टर्स का नाम वेटिंग लिस्ट में है तो ज्वाइनिंग कैसे हुई।
जांच में पता चला कि सिविल सर्जन कार्यालय में कर्मचारी द्वारा लापरवाही बरती गई साथ ही डॉक्टर्स ने सबकुछ जानते हुए फर्जीवाड़ा किया। दोनों से माफी नामा लिखवाकर घर लौटा दिया है। वहीं स्वास्थ्य मुख्यालय तक को मामले की जानकारी है, जिसके चलते किस स्तर पर चूक हुई और बिना सिलेक्शन लिस्ट में डॉक्टर्स ने ज्वाइन की जल्दबाजी की इत्यादि की जांच के निर्देश दिए थे। सिविल सर्जन डॉ. रतना भारती ने बताया कि इसकी जांच चल रही है।
वेटिंग लिस्ट में है दोनों डॉक्टर्स का नाम
स्वास्थ्य मुख्यालय की तरफ से कंबाइंड सिलेक्शन सूची जारी की थी। इसके अलावा वेटिंग लिस्ट में डॉक्टर्स के नाम थे। जिलाें में जाकर डॉक्टर्स को ज्वाॅइनिंग के निर्देश दिए थे। एक महिला व एक पुरुष डॉक्टर ने सिलेक्शन लिस्ट की आड़ और भीड़ का फायदा उठाया। इस दौरान सिविल सर्जन कार्यालय में डीलिंग हेड ने दस्तावेज की जांच नहीं की। उसने भी ज्वाॅइनिंग का लैटर जारी कर दिया। पीएमओ विभाग ने वही लापरवाही बरती। डॉक्टर्स को ज्वाॅइन करवा दिया, जोकि ओपीडी तो कभी कहीं ड्यूटी देते रहे थे।
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