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काेराेना के फैलाव का आंकलन जानने के लिए एंटी बॉडी टेस्ट कर रहा स्वास्थ्य विभाग

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कोरोना का जनसंख्या पर कितना असर हुआ है, इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग अब सेरोलॉजिकल सर्वे कर पता लगाएगा। जिससे पता लगाया जा सके कि कितने लोगों को यह संक्रमण हो चुका है। जिन लोगों को कभी कोरोना वायरस का संक्रमण हुआ था और क्या उसके बाद उनके शरीर में उसके खिलाफ लड़ने के लिए इम्युनिटी विकसित हो गई। स्वास्थ्य विभाग एंटीबॉडी टेस्ट की मदद से उन लोगों को टारगेट करेगा जो कोरोना के कंफर्म केस तो नहीं थे लेकिन उनमें कोरोना होने की संभावना बहुत ज्यादा थी।

विभाग ने ऐसी 20 श्रेणियाें में लोगों को चिन्हित किया है। इन लोगों में रेंडम एंटी बॉडी टेस्ट किए जाएंगे। जिनके ब्लड का सैंपल लेकर एलाइजा विधि से टेस्ट किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग इस सर्वे को भविष्य की तैयारियों व रिसर्च के मद्देनजर कर रहा है।

एंटी बॉडी टेस्ट के लिए अभी अम्बाला को दो किट मिली हैं। एक किट से लगभग 90 लोगों को टेस्ट किया जा सकता है। अभी तक 90 सैंपल लिए जा चुके हैं। इन सैंपल की रिपोर्ट करीब अढ़ाई घंटे में विभाग को मिल जाती है। जानकारी मुताबिक किसी के शरीर में जब विषाणुओं यानी वायरस का प्रवेश होता है तो उससे लड़ने के लिए एंटी बॉडी विकसित होने लगते हैं। जिन्हें संक्रमण के दो सप्ताह बाद तक आसानी से डिटेक्ट किया जा सकता है।

हालांकि, लंबा समय बीत जाने के बाद टेस्ट संक्रमण की सही स्थिति को डिटेक्ट नहीं कर पाता लेकिन यह जरूर पता चलता है कि व्यक्ति संक्रमित हुआ था। ऐसे सैंपल की रिपोर्ट की सफलता पर ही सर्वे आगे बढ़ाया जाता है। इसको लेकर आईसीएमआर की गाइडलाइन के तहत काम किया जाएगा।

इन श्रेणियों में लिए जाएंगे सैंपल
क्रॉनिकल डिजिज से जूझ रहे पेशेंट, बच्चे व बुजुर्ग, कंटेनमेंट जोन में आने वाले व्यक्ति, हेल्थ केयर वर्कर, सिक्योरिटी पर्सन, पुलिस, पैरामिलिट्री, सिविल डिफेंस व वालेंटियर, मीडिया से जुड़े लोग, प्रवासी व खानाबदोश लोग, इंडस्ट्रियल वर्कर एवं श्रमिक, फार्मर, बड़े बाजारों के वेंडर, म्यूनिसिपल बॉडी के कर्मचारी, ड्राइवर, बैंक, टेलीकॉम व डाक विभाग के कर्मी, दुकानदार, एयर ट्रैवल रिलेटेड स्टाफ, बंदी, कंटेनमेंट जोन की गर्भवती महिलाएं, पहले से इलाज करवा चुके मरीज, कंटेनमेंट जोन के बुजुर्ग शामिल हैं।

क्या फायदा होगा
ऐसे कई लोग हो सकते हैं, जो अनजाने में संक्रमण की चपेट में आकर ठीक हो चुके हैं। उनमें एंटीबॉडी की जांच होने पर पुष्टि की जा सकेगी। बिना लक्षण वाले मरीज के ठीक होने पर उनमें एंटीबॉडी के लेवल को जांचा जा सकेगा। साथ-साथ व्यक्ति को शरीर के प्रोटेक्शन लेवल भी पता चल जाएगा।

कोरोना के टेस्ट के दो तरीके
पहला है जेनेटिक टेस्ट या पीसीआर टेस्ट और दूसरा है एंटीबॉडी टेस्ट या सेरोलॉजिकल टेस्ट। जेनेटिक टेस्ट से किसी व्यक्ति के शरीर में एक्टिव स्टेट में मौजूद वायरस का पता चलता है। इससे उनकी जानकारी नहीं मिलती है, जिनके शरीर में कोरोना वायरस आया और चला भी गया। जो कोरोना वायरस के आने के बाद ठीक हो चुके हैं।

उनकी जानकारी एंटीबॉडी टेस्ट से मिल जाती है। कैंट सिविल अस्पताल की पैथोलॉजिस्ट डॉ. शालिनी के मुताबिक एंटीबॉडी जांच भी दो तरह की होती है। इसमें पहली है आईजीएम जांच, जिसके जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि संक्रमित मरीज में विषाणु हाल ही में आया है। जबकि दूसरी आईजीजी जांच से पता चलता है कि संक्रमण काफी दिन पुराना है।

डॉ. भारती, इंचार्ज ब्लड बैंक अम्बाला सिटी ने कहा कि काेई भी वायरस होता है। उसके बाद शरीर में एंटी बॉडी बनना शुरू हो जाती है। जिससे दो सप्ताह तक डिटेक्ट किया जा सकता है। गवर्नमेंट इस टेस्ट को इसलिए कर रही है ताकि पता चल सके कि कितने लोगों को संक्रमण हुआ और होकर ठीक हो गए। अम्बाला में 90 टेस्ट हो गए हैं।



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