कोरोना वॉरियर्स के लिए बच्चों ने कहा- दिल हमेशा पापा को सैल्यूट करता है, वो रियल हीरो
(मनोज खर्ब/विवेक मिश्र)हर किसी के जीवन में उसके पिता का अहम किरदार हाेता है। पिता अपने बच्चों के लिए हमेशा से ही राेल माॅडल रहे हैं। आज रविवार काे फादर्स डे है। इस बार हम आपको अपने पिता के प्रति उन बच्चों की फीलिंग से रूबरू करा रहे हैं जिनके पिता कोरोना महामारी में फर्स्ट फ्रंट पर वॉरियर्स की भूमिका निभा रहे हैं। इनमें पुलिस और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े चिकित्सक शामिल हैं।
बच्चों का कहना है कि लोगों को सेफ रखने में उनके पिता फर्स्ट फ्रंट पर काम कर रहे हैं। सोसायटी में जब उनके सम्मान में बातें होती है तो वो काफी गर्व महसूस करते हैं। इन बच्चों ने अपने पिता के सम्मान में फादर्स डे पर स्पेशल अरेंजमेंट किया है। किसी ने अपनी भावनाएं ग्रीटिंग कार्ड पर शेयर की हैं तो किसी ने संडे को पूरा दिन अपने पापा के साथ एंजॉय करने का प्लान बनाया है। आप भी जानें कोरोना महामारी में फर्स्ट फ्रंट पर वॉरियर्स की भूमिका निभा रहे पिता और उनके बच्चों की फीलिंग
स्पेशल कार्ड से दिया डॉक्टर को सरप्राइज
11 वर्षीय जप सिंह और 8 साल की दियारा बताती हैं कि उनके पापा डॉक्टर हरमिंदर सिंह उनके लिए रियल हीरो हैं। कोरोना काल में वो फर्स्ट फ्रंट पर अस्पताल में दिन-रात मरीजों की सेवा कर रहे हैं। शुरू में पापा जब घर नहीं आते थे तो थोड़ा बुरा लगता था। बाद में दोस्तों से फोन पर चेटिंग और सोसायटी में जब उनके पिता के सम्मान में बाते होती तो उन्हें प्राउड फील होता। जप और दियारा की मम्मी डॉ. दवेंद्र कौर भी गायनी विभाग में एडिशनल एसएमओ हैं।
रियल वॉरियर कहा तो जज्बात नहीं रुके
डॉ. जगजीत दलाल ने कहा- शनिवार को वह न्यूनोटोलॉजी विभाग में ड्यूटी पर था। दोपहर बाद घर पहुंचा तो सात साल का बेटा अक्षज और चार साल का छोटा बेटा आद्विक आई लव यू पापा और हैप्पी फादर्स डे लिखा ग्रीटिंग कार्ड हाथों में लेकर देने के लिए दौड़ पड़े। बच्चों ने हैप्पी फादर्स डे कोरोना वॉरियर बोला। तब काफी खुशी महसूस हुई। मुश्किल से जज्बात रोक पाया। पीजीआई के गायनी विभाग में कार्यरत एसोसिएट प्रोफेसर पत्नी डॉ. मोनिका दलाल ने बताया कि दोनों बच्चों ने काफी देर तक जुटकर ये ग्रीटिंग कार्ड्स खुद तैयार किए हैं।
मेरा दिल पापा को सैल्यूट करता है
10वीं कक्षा की स्टूडेंट एंजलिना राणा का कहना है कि पिता पुलिस में ऑफिसर हैं। उनकी ड्यूटी हमेशा खतरों से भरी रही है। लेकिन जब वो घर आते हैं तो नार्मल फील कराते हैं। कोरोना आने के बाद वो शुरूआत में डेढ़ महीने तक घर नहीं आए। काफी मन करता था पापा से मिलने का। बाद में जब उनके फर्ज की अहमियत समझी तो हमेशा उन्हें सैल्यूट करने को मन किया। पापा की पोस्टिंग रोहतक में है और फैमिली करनाल में। वीडियो कॉलिंग से रोज बात करती हूं।
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