शादी में 50 से ज्यादा लोगाें से अधिक जुटने की मनाही, इसलिए बिना घोड़ी व बाजा के निकल रही बारात, बेरोजगार हुए बैंड वाले बेच रहे फल और सब्जी
(मोनिल शर्मा )कोरोना के चलते 50 से ज्यादा लोगों के नहीं जुटने के नियम की वजह से शादियाें की राैनक फीकी है। क्योंकि बैंड-बाजा और बारात से गायब हैं। अधिकतर जगह तो दूल्हा घोड़ी भी नहीं चढ़ रहा। वहीं, खाने की भी आइटम सीमित हो गई हैं। ऐसे में टेंट, कैटरिंग व होटल का भी बिजनेस प्रभावित है।
टेंट एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष अनिल राव के अनुसार, कोरोना की वजह से प्रदेश में 20 हजार शादियों के स्थगित होने से करीब 400 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। लोग एडवांस वापस मांग रहे हैं, लेकिन पैसे नहीं हैं। इस वजह से एडवांस को आगे किसी समारोह में एडजस्ट किया जा रहा है। रोहतक के बैंड-बाजा संचालकों का प्रतिनिधिमंडल डीसी आरएस वर्मा से भी मिला। ज्ञापन में मांग की गई कि विवाह में 11 बैंड-बाजा वाले, 4 लाइट उठाने वाले मजदूर और घोड़ी करने की अनुमति दी जाए।
जून में बचे चार मुहूर्त, फिर 25 नवंबर से शुरू होंगे : 1 जुलाई को देवशयनी एकादशी होने से अगले 4 महीने के लिए विवाह के मुहूर्त नहीं होंगे। 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी से ही शादियां शुरू होंगी। अभी जून महीने में विवाह के लिए सिर्फ चार मुहूर्त रह गए हैं और इसमें भी 29 जून को बड़ली नवमी पर अबुझ साया होने से कई शादियां होंगी। इससे पहले 25, 26, 27 को भी विवाह के मुहूर्त हैं।
बैंड की बुकिंग नहीं मिल रही, इसलिए लगा रहे रेहड़ी
बैंड बजाने वाले गौरव, ओमप्रकाश, भीम, बंसी और सतीश कुमार ने बताया कि काम ठप है। भूखे बच्चे नहीं देखे जाते। इसलिए मजबूरी में फल और सब्जी बेचना शुरू कर दिया है। इसके लिए भी पैसे उधार लिए हैं। बैंड एसोसिएशन के जिला प्रधान रमेश कुमार ने बताया कि मार्च से जून माह में होने वाली शादियों के लिए जनवरी से ही बुकिंग होनी शुरू हो गई थी। पिछले तीन महीने में कोरोना के चलते उनके पास 35 शादियों की बुकिंग रद्द हो गई हैं। 35 साल से जो काम कर रहे थे, वह आज ठप है। 5 रुपए सैकड़ा के हिसाब से मार्केट से पैसा उठाया है और कलाकारों व मजदूरों को देकर वापस घर भेजा है।
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