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मुख्यालय ने निगम में फिर भेजी सालाना 60 लाख खर्च वाली रोड स्वीपिंग मशीन, अफसरों ने चार महीने पहले भी वापस लौटाई थी

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कंगाली के दौर से गुजर रहे नगर निगम पर एक बार फिर से मुख्यालय राेड स्वीपिंग मशीन थाैंप रहा है। इस मशीन का सालाना खर्च करीब 60 लाख रुपये है। चार महीने पहले वापस भेजी राेड स्वीपिंग मशीन काे तीन दिन पहले मुख्यालय ने फिर निगम में भिजवाया है। निगम ने हालांकि इस मशीन काे लेने से इनकार कर दिया है। फिलहाल मशीन बरवाला राेड स्थित दमकल केंद्र में खड़ी है।

दरअसल, 4 महीने पहले ही इस मशीन काे भिजवाया गया था ताे अधिकारियाें ने तर्क दिया था कि उनके पास पहले से ही राेड स्वीपिंग मशीन है जाे निगम स्टाफ के लिए काेई काम की नहीं है। इसका यूज अधिक नहीं है। दूसरी मशीन काे यहां खड़ा करना पैसे वेस्ट करने हैं। इसके बावजूद मुख्यालय के अधिकारियाें ने इसे दाेबारा भिजवाया है। जिस एजेंसी काे मशीन उपलब्ध कराने का टेंडर दिया गया था, उसके पास यह टेंडर भी है कि 4 लाख रुपये महीने के हिसाब से खुद चलाएगी और मेंटीनेंस भी उसी की हाेगी।

पहले ये दिया था अधिकारियाें ने तर्क
जब फरवरी महीने में मुख्यालय ने रोड स्वीपिंग मशीन भेजी थी ताे निगम अधिकारियाें की तरफ से तर्क दिया गया था कि इसका डीजल का खर्च हर महीने 4 से 5 लाख रुपये हाेगा। मेंटेनेंस व अन्य खर्च इसके अतिरिक्त हैं। ऐसे में मशीन लौटा दी थी। यह बड़ी सड़कों को साफ करने के काम आती है जबकि शहर में तो छोटी सड़कों को भी साफ करना होता है।

वहीं इस मशीन का जितना मासिक खर्च है, उतने में निगम प्रशासन 30 सफाईकर्मियों को अनुबंध पर रख सकता है। बता दें कि राज्यसभा सांसद डॉ. सुभाष चंद्रा ने एक रोड स्वीपिंग मशीन निगम को गिफ्ट की थी। निगम ने कुछ दिन इसे चलाया, अब मशीन खराब हो गई।

गौतम सरदाना, मेयर, नगर निगम ने कहा कि मैंने फरवरी में ही मशीन रखने से इनकार कर दिया था। बाकी फैसला अधिकारियों काे करना है। यह शहर में पहले ही कामयाब नहीं है। इससे निगम पर भार बढ़ेगा।

अशोक गर्ग, कमिश्नर, नगर निगम ने कहा कि अभी तक मशीन को लेकर एजेंसी अधिकारी मुझसे नहीं मिले हैं। शुक्रवार को मशीन की जानकारी लूंगा, फिर कोई फैसला लेंगे।



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The headquarters again sent the corporation a road sweeping machine costing 60 lakhs a year, the officers returned four months back.


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