कर्ज लेकर व गहने गिरवी रख अल्जीरिया गए 23 युवाओं काे भोजन मांगने पर पानी देते थे कंपनी कर्मी, 5 माह बाद रंधावा हेल्पलाइन की मदद से वतन लाैटे
कम समय में ज्यादा पैसा कमाने की चाह सभी में होती है। इसी चाह के साथ पंजाब, राजस्थान और बिहार के 23 युवक पांच माह पहले अल्जीरिया गए। यहां दिल्ली के एजेंट ने उन्हें एग्रीमेंट के साथ वहां भेजा, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि वह जहां जा रहे हैं, वहां भोजन तक समय पर नसीब नहीं होगा। पैसा तो दूर की बात। किसी ने 10 प्रतिशत ब्याज पर दो लाख का लोन लिया तो कोई जेवर गिरवी रख सपने पूरे करने के लिए वहां पहुंचा था। वहां युवकाें काे एग्रीमेंट के अनुसार वहां वेतन नहीं मिला।
भोजन के नाम पर पानी दिया गया। छोटा सा कमरा रहने को मिला, जहां शौचालय तक नहीं था। वापस आना चाहा तो नहीं आ सके, क्योंकि पासपोर्ट उनके कब्जे में होते हैं। किसी तरह रंधावा हेल्पलाइन से संपर्क किया। थाना छप्पर गांव के हरनेक सिंह रंधावा ने टीम के साथ इनकी मदद की। सरकार की मदद बिना इन्हें भारतीय दूतावास तक पहुंचाया। वहां से सभी की रविवार सुबह वतन वापसी हुई। परिवार के बीच पहुंच कर ये युवा खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
सभी को एक छोटे कमरे में ठहराया गया, जहां वो लेट भी नहीं सकते थे
पंजाब जालंधर के निवासी दारा राम, होशियारपुर के हरनेक सिंह, होशियारपुर के पवन कुमार, होशियारपुर के जोगेंद्र सिंह, नवां शहर के अश्वनी, नवां शहर के रोशन लाल, गुरचरण दास, जालंधर के हरभजन लाल, होशियारपुर के गुरु प्रसाद, नवा शहर के गुरजीत, हुसन लाल, चंडीगढ़ से राजसिंह, बिहार कृष्णगंज से नगीश आलम, यूपी आजमगढ़ से रविंद्र यादव, पटना बिहार से ओमनाथ, बिहार गंगाधर्मपुर निवासी इंद्रजीत का कहना है कि वे ज्यादा पढ़े नहीं हैं। इसलिए लेबर वर्क में जाना चाहते थे।
उनके पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वह कैश दे सके। इसके लिए उन्होंने से कुछ लोगों ने 10 प्रतिशत ब्याज पर कर्ज लिया। कोई गहने बेचकर आया। उनकी मुलाकात दिल्ली के एजेंट से हुई। जो लोगों को बाहर भेजता है। उन्होंने पूरी पेमेंट ली। उनके साथ एग्रीमेंट भी हुआ। पढ़ाई न होने से उन्होंने एग्रीमेंट नहीं पढ़ा। पैसे और पासपोर्ट लेकर रवाना हो गए। जैसे ही उड़ान भरी सपने सच होते दिख रहे थे। वहां कंपनी में जाते ही उनके पासपोर्ट ले लिए गए। रहने के नाम पर एक छोटा सा कमरा दिया।
जहां लेटना तो दूर खड़े भी आराम से नहीं हो सकते थे। भोजन मांगा तो पानी दिया गया। वह भी दो या तीन दिन में दिया जाता था। वहां से अपने एजेंट से किसी तरह संपर्क किया। क्योंकि अगर कंपनी से बाहर निकलते तो उनके साथ लूटपाट होती, चाकू से हमला किया जाता। डर के मारे अंदर ही रहने लगे। एजेंट से बात हुई तो उसने कहा कि ये तो एग्रीमेंट लिखा गया था कि इतनी पैसे कंपनी देगी। इससे ज्यादा हुए ताे खर्च खुद का होगा।
इस दौरान किसी तरह रंधावा हेल्पलाइन से संपर्क हुआ। किसी तरह से यहां से निकलना चाहते थे। पांच माह से यहां फंसे हैं। हरनेक सिंह रंधावा ने टीम सदस्यों से रेस्क्यू कराया। इन लोगों ने युवाओं को संदेश दिया है कि बाहर जाने से पहले एजेंट के दिए दस्तावेज चेक करो, ध्यान से पढ़ने के बाद साइन करें। तभी विदेश जाने की ओर कदम उठाए।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2CwIQai
कोई टिप्पणी नहीं