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नमस्ते, दिन में दाे बार स्नान, जूते-चप्पल घर में नहीं, बासी भाेजन का त्याग, नीम के पत्ते, कपड़े घर से बाहर धाेना और नित्य याेग

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भारतीय संस्कृति काे अपनाकर काेराेना संक्रमण के खतरे से बचा जा सकता है। सनातन जीवन शैली में सब कुछ नियत था। हाथ जाेड़कर अभिवादन हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है। सामाजिक दूरी काे आज पूरी दुनिया काेराेना से बचाव के लिए स्वीकार कर रही है। लेकिन हम पाश्चात्य संस्कृति के चक्कर में अपनी संस्कृति काे भूला बैठे है। एचएयू के कुलपति प्राे. केपी सिंह ने वेबिनार, मैसेज के माध्यम से विवि के स्टाफ और छात्र एवं छात्राओं से यह अपील की है।

विवि में एक तरह से सात सूत्रीय अभियान आगाज किया गया है। जिसके माध्यम से सभी काे संस्कृति के सूत्र बताए जा रहे हैं। कुलपति प्राे. केपी सिंह का कहना है कि अभियान का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता लाना है। अभियान सात सूत्राें पर फाेकस रहेगा। काेराेना से बचाव के मद्देनजर मास्क और सेनिटाइजर का प्रयाेग भी जरूरी है।

वीसी ने भारतीय संस्कृति से जुड़े इन 7 सूत्रों काे अपनाने का किया आह्वान

  • नमस्ते: भारतीय संस्कृति में हाथ मिलाने की परंपरा कभी नहीं रही। हाथ जाेड़कर अभिवादन करते थे। आज यही हाथ जाेड़ने की परंपरा काेराेना जैसी महामारी में बचाव के काम आ रही है।
  • दाे बार स्नान: दाे बार स्नान हमारी संस्कृति का हिस्सा था। सुबह स्नान कर पूजा पाठ करते थे और शाम काे स्नान करके संध्या। काेराेना से बचने काे हम बाहर से आने के बाद स्नान कर रहे हैं।
  • जूते-चप्पल घर में नहीं: भारतीय संस्कृति में घर में जूते-चप्पल ले जाने की परंपरा नहीं थी। बाहर ही नल पर हाथ-पांव धाेकर घर में प्रवेश करते थे। आज फिर से हम यही कर रहे हैं।
  • बासी भाेजन का त्याग: बासी भाेजन हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं रहा। तीन समय घराें में ताजा भाेजन बनाया जाता था। भाेजन बच जाता था ताे वह पशुओं काे देते थे।
  • नीम के पत्ते: पहले प्रत्येक घर में नीम का पेड़ हाेता था। नीम की दातून करते थे। चर्म राेग हाेने पर नीम के पानी से स्नान करते थे। आज दुनिया मान रही है कि नीम एंटी बैक्टीरियल है।
  • घर के बाहर कपड़े धाेना: पुरातन समय में लाेग घर के बाहर तालाब या नदी में कपड़े धाेते थे। काेराेना काल में फिर यही प्रयास है कि बाहर से आने पर कपड़े बाहर ही धाेए जाएं।
  • याेग जीव का हिस्सा: भारतीय संस्कृति में याेग सर्वाेपरि रहा है। इससे हम अपनी श्वसन क्रिया काे मजबूत करते थे। याेग से शारीरिक मजबूती आती है।


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