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ई-लर्निंग के साथ छात्रों को आसमानी बिजली से बचाव की जानकारी देंगे शिक्षक

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ऐसा पहली बार हो रहा जब माॅनूसन सीजन को शिक्षा विभाग में गंभीरता से लिया जा रहा है। अब ऑनलाइन पढ़ाई के साथ शिक्षक छात्रों को प्राकृतिक आपदा यानी आसमानी बिजली से बचाव के बारे में जागरूक करेंगे। इसे लेकर एनसीईआरटी की ओर से प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारी को लेटर जारी किया गया। निर्देश दिए कि आदेशों को गंभीरता से लिया जाए। पढ़ाई के साथ छात्रों को बचाव के बारे में बताना है। छात्र आगे अपने नजदीक लोगों को इस बारे सचेत करेंगे।

जारी लेटर में कहा गया है कि भूमंडलीय तापमान में निरंतर बढ़ोतरी के कारण आकाशीय बिजली से उत्पन्न प्राकृतिक आपदा बढ़ रही है। इनसे बचाव करना बहुत जरूरी है।

जूतों में लोहे की नाल लगी हो तो उसे उतार देना चाहिए

पानी, बिजली के तार, खंभे, हरे पेड़, मोबाइल टावर आदि से दूर हट जाए। आसमान के नीचे हो तो अपने हाथों को कानों पर रख लें ताकि बिजली की तेज आवाज से परदे प्रभावित न हों। दोनों एड़ियों को जोड़कर उकड़ू बैठें। यदि इस दौरान एक से ज्यादा व्यक्ति हैं तो एक-दूसरे हाथ पकड़ कर न खड़े हों बल्कि दूरी बनाए। छतरी या सरिया जैसी कोई चीज पास हो तो उसे दूर कर दें। ऐसी वस्तुओं पर बिजली गिरने की ज्यादा संभावना रहती है। ऊंचे पेड़ के नीचे न जाएं।

यदि पेड़, खंभे से पशु बंधे हैं तो उनको वहां से हटाकर दूसरी जगह बांध दें। पुआल के ढेर से दूर रहें, इसमें आग लगने की आशंका रहती है। जूतों में लोहे की नाल लगी हाे तो जूते उतार दें। सिर के बाल खड़े होने लगे या आपकी त्वचा सिहरने लगे तो समझें बिजली गिरने वाली है। जमीन पर उकड़ू बैठें सिरे आगे झुका लें, बांहों को घुटनों में भींच लें। शरीर झुकाना, जमीन पर लेटना खतरनाक है। अगर घर के अंदर हैं तो दरवाजे, खिड़की, बिजली उपकरणों से दूर रहें। बिजली गिरने से झुलसे व्यक्ति के ठीक होने की संभावना रहती है अगर समय पर उपचार मिले। ये सभी बातें शिक्षक छात्रों को पढ़ाई के साथ बताएंगे।



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