हाईकोर्ट ने कहा- जहां कोविड का टेस्ट किया जा सकता है, उन सभी निजी अस्पतालों को टेस्ट की इजाजत दी जाए
दिल्ली हाईकोर्ट ने टेस्टिंग क्षमता बढ़ाने के लिए गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आदेश दिया है कि जहां कोरोना का टेस्ट करने के लिए लैब हैं, उन सभी निजी अस्पतालों को टेस्ट करने की इजाजत दी जाए। कोर्ट ने कहा कि ऐसे निजी अस्पताल जहां कोरोना का इलाज किया जा रहा हो और जहां की लैब को आईसीएमआर ने टेस्ट की इजाजत दी हो, वहां मरीजों को भर्ती करने से पहले टेस्ट किया जाना चाहिए।
दिल्ली में सख्त लॉकडाउन लगाने की अपील
दिल्ली हाईकोर्ट में गुरुवार को एक और याचिका दाखिल की गई है। इसमें कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए दोबारा लॉकडाउन लगाने की अपील की गई है। इस बार इसे ज्यादा सख्ती से लागू करने की बात भी कही गई है। अदालत से कहा गया है कि इस संबंध में केजरीवाल सरकार को निर्देश दिए जाएं।
इस याचिका कहा गया कि दिल्ली सरकार यह खुद मान रही है कि देश की राजधानी में एक लाख के आसपास संक्रमण के मामले सामने आए हैं। जुलाई खत्म होते-होते यह मामले 5.5 लाख तक पहुंचने की आशंका हैं। ऐसे में सरकार को सख्त लॉकडाउन लगाने के बारे में भी सोचना चाहिए।
अस्पतालों में मरीजों की भर्ती पर एलजी ने दिए थे निर्देश
मरीजों की अस्पतालों में भर्ती के मामले में उप-राज्यपाल अनिल बैजल ने बुधवार को आदेश जारी किया था। एलजी बैजल ने कहा कि दिल्ली के अस्पतालों को एलईडी स्क्रीन पर बड़े अक्षरों में बेड की संख्या, रूम चार्ज आदि के बारे में जानकारी देनी होगी। बैजल ने कहा कि इससे जनता को सहूलियत होगी और अस्पतालों में पारदर्शिता भी आएगी।
इससे पहले एलजी ने केजरीवाल सरकार के उस फैसले को बदल दिया था, जिसमें कहा गया था कि दिल्ली के अस्पतालों में केवल दिल्ली वालों का ही इलाज किया जाएगा। एलजी बैजल ने एक दिन बाद ही फैसला पलटते हुए कहा था कि स्थानीय निवासी ना होने का हवाला देकर अस्पताल मरीज को भर्ती करने से इनकार नहीं कर सकते।
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