बिना लक्षण वाले कोरोना पॉजिटिव को घर की बजाय फिर अस्पताल में ही आइसोलेट करने की तैयारी
अस्पतालों में कोरोना के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही बेड, डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ व जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत पड़ रही है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने नई गाइडलाइन के तहत दो दिनों से मरीजों को होम आइसोलेशन में इलाज की सहूलियत दी है। स्वास्थ्य विभाग का यह फार्मूला प्रयोग के स्तर शुरू किया।
हालांकि विभागीय सूत्रों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग इस फैसल पर दाेबारा विचार करने का मन बना रहा है। विभाग कोरोना पॉजिटिव मिले मरीजों को पहले कोविड अस्पताल में रखने के मूड में है ताकि संक्रमण काे फैलने से रोका जा सके। शुक्रवार और शनिवार को पॉजिटिव मिले मरीजों में से 19 को होम आइसोलेट किया जा चुका है। मगर रविवार को कोरोना संक्रमित मिले मरीजों को अस्पताल में ही आइसोलेट किया गया।
डिस्ट्रिक्ट क्वारेंटाइन कमेटी के इंचार्ज डॉ. राजेंद्र राय ने विभाग की नई गाइडलाइन बारे अवगत कराया। जिनके मुताबिक जिन पेशेंट में काेराेना के लक्षण नहीं हैं फिर शुरुआती या हल्के लक्षण हों ऐसे मरीजों को होम आइसोलेट किया जा सकता है। इसके लिए मरीज को अपनी अंडरटेकिंग देनी होगी।
होम आइसोलेशन के लिए जरूरी नियम
मरीज के लिए घर में अलग कमरे के साथ अटैच बाथरूम एवं टॉयलेट हाे व दूसरे कमरों से दूरी हो उसे आइसोलेट किया जा सकता है। मोबाइल में आरोग्य सेतु एप डाउनलोड अाैर हेल्थ टीम के पास उसका मोबाइल नंबर हाेना चाहिए। मरीज 10 दिनाें तक स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में रहेगा ताे अगले 7 दिनाें तक सेल्फ मॉनिटरिंग रहेगी। सांस लेने में दिक्कत, छाती में दर्द, दिमाग में उलझन व होठों व अंगुलियों का रंग नीला पड़ना ऐसे मरीजों के लिए चेतावनी है।
अगर आइसोलेशन पीरियड में पहले 15 दिन बुखार रहता है और आगे 10 दिनों तक बुखार नहीं रहता तो आइसोलेशन पीरियड को खत्म किया जा सकता है। आइसोलेशन पीरियड के खत्म होने के बाद सैंपलिंग नहीं की जाएगी।
इन लोगों को दूर रहने की हिदायत
हृदय रोगी, शूगर, हाइपरटेंशन, किडनी, कैंसर, गर्भवती महिला, बच्चे व बुजुर्ग ऐसे मरीजों के संपर्क में न आएं। इन लोगों के संक्रमित होने की ज्यादा संभावना रहती है। होम आइसोलेट किए मरीजों के लिए एसएमओ नोडल अधिकारी रहेंगे। जिनकी देखरेख में एमओ व पैरामेडिकल स्टाफ मरीजों पर निगरानी रखेगा।
ये टीम मरीज को मास्क, दवाइयों, हेंड हाइजीन, सेनिटेशन, डाइट प्लान, मेडिटेशन प्लान, देखरेख करने वाले को प्रोत्साहित करने व संक्रमण से बचाव, बॉयोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट बारे बताएंगी व खुद चेक भी करेंगी। मरीज सेल्फ हेल्थ मॉनिटरिंग के तहत दिन में दो बार बॉडी टेंपरेचर, डायरिया-मलेरिया व कमजोरी आदि बारे बताएंगे। खांसी, बुखार, सूंघने की शक्ति आदि बारे बताएगा।
इलाज में जो दवाएं अस्पताल में दी जाती वे ही घर पर दी जाएंगी
- मरीजों को हाइड्रोक्सीक्लोरिक्वीन टेबलेट 400 एमजी का 5 से 7 दिन का कोर्स दिया जाता है। हालांकि, 15 साल से कम उम्र के बच्चों व रेटिना पेशेंट को ये नहीं दी जाती।
- एजिथ्रल 500 एमजी 3 से 5 दिन तक दी जाती है लेकिन हृदय रोगियों के लिए मनाही है।
- बुखार आने पर पेरासीटामोल दी जाती है जबकि कष्टदायी खांसी की स्थिति में कफ सीरप दी जाती है।
- इनके अलावा विटामिन सी, विटामिन डी, आयरन, इंफेक्शन ज्यादा बढ़ने पर सफिक्सिम जैसे एंटीबॉडी 7 दिन तक दी जाती है।
संक्रमित के संपर्क वाले चार परिवारों ने सैंपल देने से किया मना, वापस लौटी टीम
कस्तूरबा कॉलोनी कैंट में स्वास्थ्य विभाग की टीम को कोविड-19 की सैंपलिंग करने से चार फैमिली ने मना कर दिया। टीम ने परिवार के लोगों को काफी समझाने का प्रयास भी किया। लेकिन वे नहीं माने। इसलिए टीम को वापस लौटना पड़ा और मामले की सूचना डिस्ट्रिक क्वारेंटाइन कमेटी के इंचार्ज को दे दी है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बताया कि कैंट के सदर बाजार में फुटवियर शॉप के मालिक 16 जून को कोरोना पॉजिटिव मिले थे।
विभाग ने परिवार की सैंपलिंग कराई तो उसकी पत्नी भी 20 जून को पॉजिटिव मिली। पत्नी को नई गाइडलाइन के मुताबिक घर में आइसोलेट कर दिया है। विभाग की टीम रविवार को जब महिला के कांटेक्ट में आए चार फैमिली के सदस्यों की सैंपलिंग करने पहुंची तो टीम को सभी ने सैंपल कराने से मना कर दिया है। टीम काफी देर तक मौके पर ही खड़ी रही और फैमिली के न मानने पर वापस बैरंग लौटना पड़ा।
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