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हाईकोर्ट पहुंचा केयू में पीएचडी दाखिले का मामला, केयू लोक प्रशासन विभाग में पीएचडी की प्रवेश परीक्षा देने वाले छात्र ने दायर की याचिका, आज सुनवाई

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कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में पीएचडी दाखिलों में आरक्षण का लाभ न मिलने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। केयू के लोक प्रशासन विभाग के छात्र विनोद कुमार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसे मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने इस मामले में 19 जून की तारीख लगाई है।

विनोद ने इससे पहले हरियाणा विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भी इस मामले में शिकायत दी थी। राज्यपाल और केयू कुलपति के नाम भी विनोद कुमार ने शिकायत दी थी। उन्होंने कहा कि आरक्षित वर्ग के जिन विद्यार्थियों की उच्च मेरिट है, उन्हें जनरल में दाखिला मिलना चाहिए। आरक्षित वर्ग को आरक्षित वर्ग में ही दाखिला देना गलत है। उन्होंने बताया कि लोक प्रशासन विभाग की ओर से आरक्षित वर्ग को आरक्षित वर्ग में ही दाखिले दिए गए हैं। ऐसे में एक ही यूनिवर्सिटी में दो नियमों से दाखिले हो रहे हैं।

छात्र विनोद कुमार ने बताया कि वह बीसी ए से संबंध रखता है। बीसी ए वर्ग के जिस छात्र की पीएचडी दाखिलों में उससे अधिक मेरिट है, उसके अंक जनरल छात्र से भी अधिक हैं। ऐसे में उसका नंबर जनरल सीट पर होना चाहिए, लेकिन उक्त छात्र को विभाग बीसी ए की सीट पर ही दाखिला दे रहा है। इसके चलते उसका दाखिला नहीं हो पा रहा है।

उक्त छात्र ने नेट और एमफिल दोनों की हुई हैं और एमफिल के आधार पर उसने फीस जमा करवाई है, जिसमें उसे कोर्स वर्क नहीं करना पड़ेगा, लेकिन केयू प्रशासन उक्त छात्र के नेट को ही आधार बनाकर मेरिट सूची में उसे बीसी ए वर्ग में रख रहा है। विनोद ने बताया कि इस मामले में उसने कुलपति, राज्यपाल और विधिक सेवा प्राधिकरण को भी शिकायत दी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया। जिसके कारण अब उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने बताया कि इस मामले में 19 जून को सुनवाई होगी।

आरक्षण खत्म करने का हो रहा प्रयास : सभ्रवाल
छात्र संगठन अंबेडकर स्टूडेंट वेलफेयर एसोसिएशन असवा के चेयरमैन राजीव सभ्रवाल ने कहा कि केयू प्रशासन की ओर से आरक्षण को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आरक्षित वर्ग के विद्यार्थी जब उच्च मेरिट प्राप्त करते हैं तो उन्हें आरक्षित वर्ग की बजाय जनरल में उनकी मेरिट अनुसार दाखिला मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरक्षण का लाभ तभी है जब जरूरतमंद को कम अंकों के बावजूद दाखिला मिले। अगर उच्च मेरिट के बावजूद आरक्षित सीट पर ही दाखिला दिया जाएगा तो फिर आरक्षित सीट का कोई लाभ नहीं है। आरक्षण कमजोर वर्ग के बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए था, लेकिन विद्यार्थियों को उच्च मेरिट होने के बावजूद उन्हीं के वर्ग में रखकर दाखिले दिए जाएंगे तो आरक्षण का प्रावधान करने का महत्व खत्म हो जाएगा।



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