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तीन माह बाद 9 जुलाई से फिर होगी हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान गर्भवतियों की संख्या ज्यादा रही तो दो से तीन दिन चलेगा शिविर

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गर्भवती महिलाओं के लिए राहत की खबर है। करीब तीन माह बाद 9 जुलाई काे प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत शिविर लगेगा। इसमें गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच कर उनमें हाई रिस्क प्रेग्नेंसी केसों की पहचान की जाएगी। हालांकि कोरोना के मद्देनजर शिविर में सोशल डिस्टेंसिंग सहित संक्रमण से बचाव के तमाम उपायों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। अगर गर्भवती महिलाएं ज्यादा संख्या में आती हैं तो शिविर को 2 से 3 दिन तक चलाया जाएगा।

दरअसल, यह अभियान मातृत्व व शिशु मृत्युदर में कमी लाने व जन्मदर में बढ़ोतरी के लिए शुरू हुआ है।कोरोना की चेन तोड़ने के लिए लॉकडाउन से अनलॉक के बीच अभियान के तहत लगने वाले शिविर स्थगित करने पड़े थे। अब पुन: शिविर लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला सिविल सर्जन एवं एनएचएम नोडल ऑफिसर को दिशा-निर्देश दिए हैं।

जानिए... शिविर से क्या होता है फायदा और कैसे की जाती है स्क्रीनिंग
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत शिविर में गर्भवती महिलाओं को संपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया होती है। इसमें स्त्री रोग विशेषज्ञों के परामर्श, टेस्टिंग से लेकर दवाइयां परामर्श शामिल हैं। इस दौरान उन गर्भवतियों की पहचान होती है जो अस्वस्थ हैं या फिर एचआईवी, काला पीलिया, एनीमिया, संक्रमित-गैर संक्रमित बीमारियाें से ग्रस्त हैं। इसके बाद गर्भवती व गर्भ में पल रहें शिशु को स्वस्थ रखने के लिए इलाज शुरू होता है। यही वजह है कि मातृत्व-शिशु मृत्युदर में काफी कमी आई है। खास बात यह कि इस शिविर में न सिर्फ सरकारी बल्कि निजी अस्पतालों की स्त्री रोग विशेषज्ञ भी सेवाएं देती हैं।

ओपीडी सेवाएं सुचारू नहीं, अभियान शुरू करने के निर्देश : डॉ. शर्मा
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत 9 जुलाई को शिविर लगेगा। इससे पूर्व ओपीडी सेवाएं सुचारू रहीं, जिससे गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया होती रही हैं। शिविर में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान करते हैं ताकि डिलीवरी के दौरान व डिलीवरी के बाद जच्चा-बच्चा स्वस्थ हों। इस बार शिविर में सोशल डिस्टेंसिंग का विशेष ध्यान रखेंगे। मास्क पहनना अनिवार्य होगा। शिविर को गर्भवतियों की संख्या देखते हुए दो या तीन दिन भी चला सकते हैं।'' डॉ. जितेंद्र शर्मा, नोडल ऑफिसर एनएचएम, डिप्टी सिविल सर्जन।



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